डॉ. Thomas Stoltz Harvey, Albert Einstein के मष्तिष्क के साथ
चित्र 1: डॉ. Thomas Stoltz Harvey, Albert Einstein के मष्तिष्क के साथ।

यह स्वाभाविक लगता है कि Genius यानी प्रतिभाशाली भौतिक संरचना में निहित है, इसलिए यदि हम अल्बर्ट आइंस्टीन(Albert Einstein) के मस्तिष्क के अंदर गहरी जांच करते हैं तो क्या होगा?  क्या हम Genius के रहस्यों को अनलॉक कर सकेंगे, या साधारण दिमाग को बदलकर प्रतिभाशाली दिमाग बना सकेंगे। हम उत्तर देने में लगभग असमर्थ होंगे परंतु एक व्यक्ति का मानना था कि यह संभव हो सकता है और उसने इसे साबित करने के लिए अपना सब कुछ जोखिम में डाल दिया।

डॉ. थॉमस स्टोल्ट्ज़ हार्वे(Thomas Stoltz Harvey) जो की पेशे से एक पैथोलॉजिस्ट यानी चिकित्सक थे। एक ऐसे व्यक्ति जो प्रतिभाशाली पैदा नहीं हुए थे पर जब उन्हें एक प्रतिभाशाली व्यक्ति मिला तो उन्होंने प्रतिभावान के रहस्यों को जानने के लिए अपना सबकुछ दाव पर लगा दिया। जानिए थॉमस हार्वे ने कैसे अल्बर्ट आइंस्टीन के प्रतिभावान के रहस्यों को जानने के लिए उनके दिमाग को चुराया जिसके लिए उन्हें अपना सबकुछ दाव पर लगाना पड़ा।

बुद्धिमानी के सुपरस्टार अल्बर्ट आइंस्टीन

बुद्धिमानी के सुपरस्टार अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु 18 अप्रैल 1955 के रात 1:15 पर हुआ था, और मृत्यु के कारण का पता लगाने का कार्य थॉमस हार्वे को सौंपा गया परंतु हार्वे के मन में कुछ और ही चल रहा था, हार्वे अल्बर्ट आइंस्टीन के जीनीयस होने का पता लगाना चाहते थे, इस प्रकार डॉक्टर हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग को निकालकर उस पर शोध करने का मन बना लिया और बीसवीं सदी के सबसे महान वैज्ञानिक के मस्तिष्क की जांच करना शुरू कर दिया।

हालांकि अल्बर्ट आइंस्टीन कभी ऐसा नहीं चाहते थे कि उनके मृत्यु के बाद उनके शरीर का वैज्ञानिक जांच हो, वे केवल चाहते थे कि उनके विज्ञान के प्रति योगदान को लोग याद रखें और उनके खोजो पर शोध करें ना कि उनके शरीर पर। लेकिन इसके बाद भी हार्वे आइंस्टीन के परिवार के अनुमति के बिना ही आइंस्टीन के मस्तिष्क को निकाल लिया और उसे अपने लंच बॉक्स में रख कर चोरी से अपने घर ले आए।

अल्बर्ट आइंस्टीन का परिवार अचंभित

इधर आइंस्टीन का परिवार अचंभित था सारे सरकारी अधिकारी एवं हार्वे के सहकर्मी आइंस्टीन के मस्तिष्क की मांग करने लगे परंतु जब हार्वे ने कसम खाया कि वह मस्तिष्क का उपयोग केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए ही करेगा तब आइंस्टीन के बेटे ने हार्वे को ऐसा करने की अनुमति दे दी और इस प्रकार हार्वे आइंस्टीन के मस्तिष्क का संरक्षक बन गया, अब उसे आइंस्टीन के शानदार दिमाग के रहस्य को अनलॉक करना था।

लेकिन हार्वे एक रोग विज्ञानी था तंत्रिका वैज्ञानी(neuroscientist) नहीं। परंतु फिर भी हार्वे मस्तिष्क की जांच प्रारंभ करते हुए मस्तिष्क को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर एक साधारण माइक्रोस्कोप से उसकी जांच करना प्रारंभ कर दिए।

ठीक इसी प्रकार 1924 में जब सोवियत यूनियन के संस्थापक व्लादमीर लेनिन की मृत्यु हुई थी तो रूसी यह जानने के लिए बेताब थे कि लेनिन के मस्तिष्क में ऐसा क्या था जिसने उन्हें एक प्रतिभावान बनाया। इसे जानने के लिए रुसी, न्यूरोसाइंटिस्ट ऑस्कर वोग्ट के साथ लेनिन के ब्रेन पर शोध करने के लिए एक इंस्टिट्यूट खोला और शोध में पाया कि लेनिन के बुद्धिमान होने का कारण उनके मस्तिष्क के सेरेब्रल कॉर्टेक्स(cerebral cortex) के तीसरी परत में कुछ पिरामिड न्यूरॉन्स बहुत बड़े थे।” मॉस्को के मस्तिष्क संस्थान की तुलना में हार्वे की सुविधाएं बुनियादी थी और इस प्रकार साल दर साल बीत गए पर हार्वे अपना वादा पूरा करने में असमर्थ थे।

इसी बीच इस मस्तिष्क के कारण हार्वे के पारिवारिक संबंध खराब होते जा रहे थे, और हार्वे ने अपने अध्यक्षता के लिए अपने परिवार तक को छोड़ दिया और 1960 में प्रिंसटन शहर को भी छोड़ दिया और फिर एक शहर से दूसरे शहर और एक नौकरी से दूसरी नौकरी दूसरी शादी फिर तीसरी आखिरकार अंत में हार्वे के मेडिकल लाइसेंस को रद्द कर दिया गया और उसके बाद हार्वे एक प्लास्टिक के फैक्ट्री में काम करने लगे। लेकिन अबतक हार्वे आइंस्टीन के दिमाग के रहस्यों को समझने में कोई प्रगति नहीं कर पाए थे।

आखिरकार हार्वे को स्वीकार करना पड़ा कि वे आइंस्टीनके दिमाग के रहस्य को खोजने में सक्षम नहीं है और असमर्थ है, और फिर अंत में हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग को बर्कले(Berkeley) में न्यूरोसाइंटिस्ट के पास भेज दिया, वहां वैज्ञानिकों ने आइंस्टीन के दिमाग में Glial कोशिकाओं की मात्रा किसी आम इंसान से ज्यादा पाया “Glial कोशिकाएं मस्तिष्क में सहायता और पोषण प्रदान करती है सिगनल ट्रांसमिशन में भाग लेती है और न्यूरॉन्स के अलावा यह मस्तिष्क का एक अभिन्न अंग है।”

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अल्बर्ट आइंस्टीन हमेशा कहते थे कि वे अपने समस्याओं को अपने दिमाग में कल्पना करके हल करते हैं।

तो क्या दिमाग में अतिरिक्त Glial कोशिकाएं होने से हम अपने कल्पना शक्ति को बढ़ा सकते हैं? क्या Glial कोशिकाएं आइंस्टीन के प्रतिभावान होने का रहस्य है? या शायद नहीं।

1996 में आखिरकार अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग प्रिंसटन अस्पताल वापस पहुंच गया, जहां से हार्वे ने 41 साल पहले इसे चुराया था। खुद हार्वे भी प्रिंसटन लौट आए और यहीं पर हार्वे की मृत्यु हुई। हार्वे प्रतिभावान के दिमाग के रहस्यों को कभी अनलॉक नहीं कर पाए लेकिन अगर कोई एक दिन ऐसा करता है तो क्या वह हार्वे को सही साबित करेगा?


स्त्रोत

  • Modi, K. (2008, March). The stolen brain of Einstein. In APS March Meeting Abstracts (pp. K1-239).
  • Castro, J. C. (2012). The mysterious disappearance and long journey of Albert Einstein’s brain. Cirujano General34(4), 276-279.
  • Lepore, F. E. (2018). Finding Einstein’s Brain. Rutgers University Press.

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