क्या ब्रह्मांड एक Computer Simulation है?

Kya Ham Ek Computer Simulation Me Reh Rahein Hain

क्या ब्रह्मांड एक Computer Simulation है?, क्या सिमुलेशन सिद्धांत(Simulation Theory) का प्रस्ताव है?, क्या पृथ्वी और ब्रह्मांड सहित वास्तविकता के सभी पहलू, वास्तव में एक कृत्रिम सिमुलेशन है? जानिए इस लेख मे।


Computer Simulation Theory की परिभाषा

सिमुलेशन परिकल्पना या सिमुलेशन सिद्धांत(Simulation Theory) का प्रस्ताव है कि, पृथ्वी और ब्रह्मांड सहित वास्तविकता के सभी पहलू, वास्तव में एक कृत्रिम सिमुलेशन है, सबसे अधिक संभावना है कि कंप्यूटर सिमुलेशन(Computer Simulation)। कुछ संस्करण एक सिम्युलेटेड वास्तविकता के विकास पर निर्भर करते हैं, एक प्रस्तावित तकनीक जो अपने निवासियों को यह समझाने के लिए पर्याप्त यथार्थवादी होगी कि सिमुलेशन वास्तविक था।

इतिहास

1970 मे एक ब्रिटिश गणितज्ञ John Horton Conway ने एक प्रोजेक्ट बनाया था, जिसे Conway’s Game of Life के नाम से भी जाना जाता है। इतिहास में और भी पीछे देखेें तो ग्रीक फिलोसोफर सुकरात का भी मानना था कि यह दुनिया असल दुनिया नहीं। भगवत गीता में भी इसका उल्लेख है जिसमें कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि यह संसार एक माया है। तो क्या वास्तव में संपूर्ण ब्रह्मांड एक कंप्यूटर सिमुलेशन है, जानिए आगे –

गेम ऑफ लाइफ(Game of Life)

गेम ऑफ लाइफ(Game of Life) एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसमें शुरुआत में आपको कुछ शर्तें डालने होते हैं और एक बार प्रारंभिक शर्तें डालने के बाद सिमुलेशन के नियमों का छोटा सा सेट चलने लगता है। जिसमें कुछ पैटर्न बस थोड़े समय तक चलते हैं और फिर गायब हो जाते हैं, गेम की भाषा में कहें तो मर जाते हैं, दूसरी तरफ कुछ पैटर्न हमेशा के लिए चलते रहते हैं। आज जो भी गेम आप खेलते हैं वह इसी कंप्यूटर सिमुलेशन के सिद्धांत पर बना है, ऐसे गेम जिसे हम अपने इच्छा अनुसार कंट्रोल कर सकते हैं।

A single Gosper's glider gun creating "gliders"
एक एकल गॉस्पर की glider gun “gliders” बना रही है।

तो क्या इस गेम की ही तरह कोई कंप्यूटर सिमुलेशन बहुत बड़ा परिणाम नहीं दे सकता एक ऐसा सिमुलेशन जो पूरे ब्रह्मांड के आकार का हो जो स्क्रीन पर केवल डॉट्स और पैटर्न ना हो बल्कि आकाशगंगाओं, ग्रहों और जीवन के साथ एक सिमुलेशन हो इससे भी महत्वपूर्ण बात कि कहीं हम ऐसे ही किसी सिमुलेशन में तो नहीं रह रहे, या यूं कहें जिस दुनिया में हम रह रहे हैं क्या वह असली है।

आधुनिक युग मे Computer Simulation Theory

आधुनिक युग में ऐसे बहुत से वैज्ञानिक सिद्धांत हैं जो यह साबित करते हैं कि हमारी दुनिया एक कंप्यूटर सिमुलेशन है और हम सब बायोलॉजिकल वस्तु नहीं बल्कि एक सिमुलेटेड प्रोग्राम है। ऐसे ही सिद्धांतों में से एक सबसे ज्यादा विख्यात “सिमुलेशन अरगुमेंट” है जिसे 2003 में फिलोसोफर निक बॉस्ट्रोम(Nick Bostrom) ने रखा था। उनके प्रस्ताव के अनुसार मानव जाति एक अधिक उन्नत सभ्यता के द्वारा बनाए गए कंप्यूटर सिमुलेशन का हिस्सा हो सकते हैं। इसके इलावा स्टीफन हॉकिंग भी सिमुलेशन थ्योरी को सच मानते थे। चलिए इसे और विस्तार से जानते हैं –

सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव वास्तविकता

आप किसी वस्तु को कैसे ऑब्जर्व करते हैं आप जरूर उन्हें देखकर छूकर या फिर अपने किसी भी सेंसस का उपयोग करके ऑब्जर्व करते हैं, यह आपका सब्जेक्टिव रियालिटी यानी व्यक्ति परक वास्तविकता है जिसमें सब्जेक्ट आप ही हैं जो किसी वस्तु या चीजों को observe कर रहा है। ठीक इसी प्रकार ऑब्जेक्टिव रियलिटी यानी वस्तुगत वास्तविकता वह वस्तु है जिसे आप ऑब्जर्व यानी निरीक्षण कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए अगर मैं घर के बाहर जाता हूं और महसूस करता हूं कि बाहर ठंड है और आप बाहर जाते हैं और महसूस करते हैं कि बाहर गर्मी है तो यहां सब्जेक्टिव रियालिटी यानी व्यक्तिपरख वास्तविकता यह है, कि दो अलग-अलग दिमाग दो अलग-अलग लोग एक ही वस्तु को कई तरीकों से देख सकते हैं और यहां ऑब्जेक्टिव रियालिटी यानी वस्तुगत वास्तविकता यह है कि बाहर या तो ठंडा होगा या गर्मी। हम दोनों को ही अपने-अपने ऑब्जरवेशन को साबित करने के लिए ऑब्जेक्टिव रियालिटी को ऑब्जर्व किए बिना ही ऑब्जर्व करना होगा जो कि एक स्पष्ट विरोधाभास है। ठीक इसी प्रकार क्या कोई वस्तु तब भी मौजूद होती है जब आप उन्हें देख नहीं रहे हो उदाहरण के लिए आप अपने कंप्यूटर या फोन या फिर जिस डिवाइस पर भी यह लेख पढ़ रहे हैं वह डिवाइस आप जानते ही हैं कि माइक्रोस्कोपिक लेवल पर परमाणुओं से बना है लेकिन आप वास्तव में उन एटम्स को नहीं देख सकते तब तक नहीं जब तक कि आप इसके ऑब्जरवेशन के लिए माइक्रोस्कोप उपकरण नहीं लेते।

आपने गेम में देखा ही होगा कुछ चीजें हमें तभी दिखती हैं जब वास्तव में उन्हें देखते हैं तो क्या यह सच नहीं हो सकता कि हम इंसानों को भी कोई वस्तु तभी दिखती है जब हम वास्तव में उसे देख या छू रहे हो इस बात को थॉमस यंग ने अपने डबल स्लित एक्सपेरिमेंट में साबित भी किया है।

दोस्तों जब भी हम किसी भी वस्तु या चीजों को ऑब्जर्व करते हैं तो हमारे सेंस ऑर्गन हमारे दिमाग को एक इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजता है जिसके आधार पर दिमाग हमें उस वस्तु का एहसास कराता है एक निश्चित तरीके से दुनिया के बारे में अपना दृष्टिकोण बनाने के लिए है दिमाग हमारे सेंसेस यानी इंद्रियों का उपयोग करता है। इसलिए हमारे दिमाग के पास इतनी क्षमता है कि यह हमें वास्तविकता को किसी भी प्रकार से दिखा सकता है, जैसे कि हमारे सपने जब हम सपना देख रहे होते हैं तो हमें लगता है कि सब कुछ वास्तव में है, हमें असल वास्तविकता के बारे में तभी पता चलता है जब हम जागते हैं।

दोस्तों अब तक हमने जाना कि कैसे सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव रियालिटी किसी वस्तु के होने या ना होने पर सवाल उठा सकता है अब चलिए कुछ ऐसे सिद्धांतों को जानते हैं जो सिमुलेशन थ्योरी को सच साबित करते हैं –

Fermi paradox

Fermi paradox के अनुसार जब हम ब्रह्मांड में दूर-दूर तक देखते हैं तो, हमें जीवन के कोई भी अन्य लक्षण क्यों नहीं दिखाई देते क्या हम ब्रह्मांड में वास्तव में अकेले हैं या हम दूसरे ग्रहों पर जीवन खोजने में पूरी तरह से प्रयास नहीं कर रहे हैं। क्या इस विशाल ब्रह्मांड में कोई भी ऐसी सभ्यता नहीं है जो इतनी विकसित हो कि वह हमें खोज सकें और हम तक पहुंच सके।

Anthropic principle

दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी जीवन के लिए इतना उत्तम स्थान क्यों है, एंथ्रोपिक प्रिंसिपल(Anthropic principle) कहता है कि पृथ्वी पर सब कुछ इतना सटीक क्यों है। चाहे सूर्य से इसकी दूरी की बात करें या यहां के वातावरण की, या फिर ग्रेविटी की, क्या इन्हें ऐसा बनाया गया है।

String theory

स्ट्रिंग थ्योरी(String theory) से बिग बैंक के पहले के समय को समझना आसान हो जाता है, और इसके अध्ययन से पता चला है कि ब्रह्मांड में कंप्यूटर कोड्स मौजूद हैं, जिससे यह लगभग साबित होता है कि यह ब्रह्मांड एक कंप्यूटर सिमुलेशन है।

Simulation Theory मे कमियां

सिमुलेशन चाहे कितनी भी परफेक्ट क्यों ना हो उसमें कुछ ना कुछ कमियां रह जाती है, जैसे कि

Deja Vu

“Deja Vu” यानी कि ऐसी स्थिति जब आपको कोई स्थान या व्यक्ति जाना पहचाना लगता है जबकि आप उस स्थान पर पहले कभी नहीं गए और उस व्यक्ति को पहले कभी नहीं देखा।

सुपरनैचुरल वस्तुएं या हमारे सपने

दूसरा उदाहरण है सुपरनैचुरल वस्तुएं या हमारे सपने सुपरनैचुरल वस्तुएं जैसे भूत प्रेत या आत्माएं जोकि सिमुलेशन के प्रोग्राम में किसी खराबी या बग के कारण दिख सकता है।

भगवान एक प्रोग्रामर

सिमुलेशन थ्योरी के अनुसार भगवान एक प्रोग्रामर हो सकता है जिसने इस ब्रम्हांड का निर्माण किया है, लेकिन सिमुलेशन थ्योरी साथ ही यह भी कहता है कि, भगवान ऐसा क्यों करेगा? हो सकता है भगवान या फिर प्रोग्रामर यह देखना चाहता हो कि कोई सभ्यता कैसे विकसित होती है। सिमुलेशन थ्योरी के अनुसार जिस भी व्यक्ति को सिमुलेशन में जीवन के अस्तित्व का पता चल जाता है, भगवान यानी प्रोग्रामर उसे प्रोग्राम से डिलीट कर देता है, उदाहरण के लिए वे सभी ऋषि मुनि जो तपस्या करते करते अपना शरीर त्याग देते हैं, या फिर वे सभी वैज्ञानि और लोग जिनका रहस्यमई तरीके से मृत्यु हो जाता है। सिमुलेशन थ्योरी के अनुसार अगर हमारी दुनिया एक कंप्यूटर सिमुलेशन है तो यह भी हो सकता है कि जिन्होंने हमारी दुनिया बनाई, हो सकता है उनकी दुनिया भी सिमुलेटेड हो, और यहां यह क्रम कहाँ तक है यह कह पाना संभव नहीं।

निष्कर्ष

दोस्तों मानव जाति अब तक इतना सक्षम हो गया है कि, वह किसी भी प्रकार का सिमुलेशन कंप्यूटर कोड्स और मैथमेटिकल समीकरण की सहायता से बना सकता है, और सिमुलेशन में मौजूद सभी प्रकार के जीवो को भी, लेकिन हम इन जीवो में ऐसे प्रोग्रामिंग नहीं कर सकते कि वे खुद सोचने समझने की क्षमता रखता हो। इसलिए विज्ञान में हर एक थ्योरी को साबित करने के लिए उसे मैथमेटिकल समीकरण में लिखना होता है क्योंकि पूरे ब्रह्मांड को नंबर्स और समीकरण से ही समझा जा सकता है।

आधुनिक युग में ऐसे बहुत से साइंटिफिक थ्योरी तो हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह ब्रह्माण्ड एक कंप्यूटर सिमुलेशन है, लेकिन अब तक ऐसी कोई भी गणितीय समीकरण नहीं है जो इसे गणितीय रूप साबित कर सके। जिस प्रकार यह कहना कठिन है कि यह ब्रह्मांड एक कंप्यूटर सिमुलेशन नहीं है, ठीक उसी प्रकार यह भी कहना कठिन है कि यह ब्रह्मांड एक कंप्यूटर सिमुलेशन है, तो दोस्तों अगर किसी दिन किसी वैज्ञानिक ने सिमुलेशन थ्योरी को गणितीय समीकरण द्वारा साबित कर पाया तो उम्मीद है, कि हमारा जीवन का यह खेल वह खेल होगा जिसे हम जीत सकते हैं।

अगर आपको सिमुलेशन थ्योरी के बारे में और भी जानना है तो आप इस लेख के रिसर्च पेपर्स पढ़ सकते हैं जिसका लिंक आपको नीचे मिल जाएगा इसके अलावा आप सिमुलेशन थ्योरी पर आधारित फिल्में जैसे कि द मैट्रिक्स,The Thirteenth floor और द इनसेप्शन जरूर देखें।


कंप्यूटर सिमुलेशन पर वीडियो देखें।

Sources और Research Papers:

  1. The Objective Reality: http://www.ict.griffith.edu.au/joan/atheism/reality.php
  2. ARE YOU LIVING IN A COMPUTER SIMULATION? : https://www.simulation-argument.com/simulation.html
  3. Objectivity: https://www.iep.utm.edu/objectiv/
  4. http://www.illustris-project.org/media/

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