Sindhu Ghati Ka Itihas

सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास –

सिंधु घाटी सभ्यता एक प्राचीन सभ्यता है, जो आज के पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित है, सिंधु घाटी सभ्यता को इंडस वैली के नाम से भी जाना जाता है, जिसका विकास सिंधु और घाघर के किनारे हुआ। वैज्ञानिकों द्वारा बताया जाता है कि 1856 मैं जॉन और विलियम ब्रंटन ने कराची से लाहौर तक रेलवे के लिए खुदाई करवाई और खुदाई के दौरान ही इस सभ्यता के अवशेष मिले और इसके बाद इसे हड़प्पा सभ्यता का नाम दिया गया।

क्यों पड़ा इंडस वैली नाम –

इस सभ्यता का खोज का श्रेय राय बहादुर दयाराम शाहनीे को जाता है। इन्होंने ही पुरातत्व विज्ञान सर जॉन मार्शल के देखरेख में 1921 मे इस जगह की खुदाई करवाई। जिसके बाद मोहनजोदारो में बने एक स्तूप की खुदाई के समय एक और स्थान का पता चला जिससे यह पता लगा कि यह स्थान केवल सिंधु नदी तक ही सीमित नहीं। इसी प्रकार इसका नाम Indus valley Civilization पड़ा। इसके प्रमुख स्थानों के नाम मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, राखीगढ़ी और हड़प्पा हैं।

सिंधु घाटी के आसपास खुदाई में मिलने वाली चीज है –

सिंधु घाटी सभ्यता प्राचीन काल की महत्वपूर्ण प्रारंभिक सभ्यताओं में से एक थी। इस लेखन प्रणाली के उदाहरण –

  • मिट्टी के बर्तनों, ताबीज, नक्काशीदार स्टैम्प, और यहां तक ​​कि वजन और तांबे की गोलियों में भी पाए गए ।
  • सिंधु सभ्यता के लोगों को गेहूं, चने, तिल, धान और अन्य कई प्रकार के अनाजों का भी ज्ञान था और वह इनकी अच्छी खेती भी करते थे।
  • कुछ अन्य साक्ष्य के अनुसार कहा जाता है वे सभी प्रकार के पालतू जानवरों जैसे भेड़, भैंस, बकरी, सूअर, कुत्ते, ऊंट पाला करते थे।
  • स्वास्तिक चिन्ह हड़प्पा सभ्यता की ही देन है इससे यह पता लगाया जा सकता है कि यह सूर्य की उपासना भी करते थे सिंधु सभ्यता की लिपि में 700 सचिन अक्षर होते थे जिनमें से अबतक 400 का ही पता लगाया गया है।
मोहेंजो-दारो की डांसिंग गर्ल; 2400-1900 ई.पू.
मोहेंजो-दारो की डांसिंग गर्ल; 2400-1900 ई.पू.
हड़प्पा (Cemetery H culture, c. 1900-1300 ईसा पूर्व) से मिट्टी के बर्तनों के कलश।
हड़प्पा (Cemetery H culture, c. 1900-1300 ईसा पूर्व) से मिट्टी के बर्तनों के कलश।

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विनाश कैसे हुआ –

लगभग 4000 साल पहले खत्म हुई सिंधु घाटी को वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह से जानने मे लगें हुए हैं, वैज्ञानिकों का यह मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यहां के लोगों को पलायन करना पड़ा। सिंधु नदी जहां समुद्र में मिलती है वहां ऑक्सीजन बहुत कम मात्रा में पाई जाती है बताया जाता है कि मॉनसून में यहां भारी बारिश होती है और गर्मियों में यहां सूखा पड़ जाता है इसके कारण सिंधु घाटी के लोगों को पहाड़ों की चोटियों पर जाकर रहना पड़ा पर कुछ दिन बाद वहां भी सूखा पड़ गया । इससे इनकी सभ्यता का अंत हो गया। पाकिस्तान के पश्चिम भारत में स्थित हड़प्पा सभ्यता के नाम से जानी जाने वाली सिंधु घाटी सभ्यता 5300 साल से 3300 साल तक इस सभ्यता का अस्तित्व रहा। इस सभ्यता की आबादी 5000000 से अधिक थी।

जिस तरह global warming के वजह से पूरे हड़प्पा सभ्यता के नाम से जाने जाने वाले सिंधु घाटी का अंत हो गया आधुनिक युग में हमें यह सोचना चाहिए कि global warming के कारण हम पर क्या संकट आ सकते हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी –

इस लेख के प्रकाशन की तिथि: 25 अक्टूबर, 2019 और अंतिम संशोधित(modified) तिथि: 16 जुलाई, 2021

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आरती सरकार एक फ्रीलांस कंटेंट राइटर हैं। वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इतिहास और राजनीति पर लिखती हैं। वह इतिहास और वित्त लेख लिखने के लिए भी जानी जाती हैं।

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