Harappan Civilization in Hindi.

Harappan Civilization In Hindi.
Harappan Civilization

Harappan Civilization हड़प्पा सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता थी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के मंटेगोमेरी जिले, पहले भारत अब पाकिस्तान में स्थित हैं।

हड़प्पा का रहस्य सिंधु घाटी सभ्यता (Indus valley Civilization)

सिंधु घाटी सभ्यता सिंधु नदी का उल्लेख करती है।  मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी क्षेत्र अत्यंत व्यापक था, सिंधु सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक है।  विद्वानों ने इसे सिंधु घाटी सभ्यता का नाम दिया, क्योंकि यह क्षेत्र सिंधु और उसके सहायक नदियों के क्षेत्र में आते हैं,पर बाद में रोपड़, लोथल,कालीबंगा,वनमाली, रंगापुरा दी क्षेत्रों में भी इस सभ्यता के अवशेष मिले जो सिंधु और उसके सहायक नदियों के क्षेत्र से बाहर थे।

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार( Expansion of the Harappan civilization)

हड़प्पा सभ्यता एक नगरीय संगठन था, जहां कुछ चिन्हों के दौरान सात भिन्नता पायी गयी। मोहन जोदड़ो  के विनाश के दौरान, हड़प्पा सभ्यता ने मोहन जोदड़ो के शहर को पुन:र्निर्माण किया। उस समय हड़प्पा सभ्यता  शहरी जीवन की प्रगति पर आधारित थी।

हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना ( Town planning of Harappan  civilization )

हड़प्पा के लोगों का जीवन बहुत ही सुखद और शांतिपूर्ण था। हड़प्पा समुदाय ग्रामीण इलाके में रहता था। वे लोग बहुत ही अच्छे विचारों के और मददगार लोग थे, वे बिलकुल भी खतरनाक नहीं थे। जिन बड़े शहरों के घरों में लोग रहते थे, वे घर पांच फुट की लंबाई और 97 फुट की चौड़ाई के हुआ करते थे। उनके भवनों में दो कमरे वाले घर होते थे।

हड़प्पा सभ्यता के शहरों को बहुत अच्छी योजना और बड़ी खूबसूरती से बनाया गया था। सड़क के दोनों किनारों पर पंक्तियों में घर बनाए गए थे। भवन का निर्माण करने के लिए उन्होंने धूप में सूखी हुई ईंटों का प्रयोग किया था। कुछ घर गलियों में भी बनाये गये थे। अमीर लोग बड़े घरों में रहते थे, उनके पास कई कमरे वाले घर होते थे। मुख्य रूप से, गरीब लोग छोटे घरों और झोपड़ियों में रहते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता में, जल निकासी प्रणाली बहुत व्यवस्थित क्रम में थी, हर घर में सबसे अच्छी सुविधा के लिए नाली व्यवस्था का प्रयोग किया गया था। प्रत्येक घर से पानी की निकासी का स्थान ईंटों से बनाया गया था।  

हड़प्पा सभ्यता का धर्म ( Dharma of Harappan civilisation )

मोहन जोदड़ो और हड़प्पा में कोई मंदिर और देवता की छवि नहीं थी। हड़प्पा और सिंधु लोग अपने स्थान को लेकर बहुत ही धार्मिक थे। वे मां को पूजते थे जिसमें शिव पशुपति प्रख्यात थे। वे “लिंग” और वृक्ष, सांप, पशु आदि की पूजा भी करते थे।