Home लोग गुस्ताव किरचॉफ: जिन्होंने ब्लैक-बॉडी रेडिएशन शब्द गढ़ा

गुस्ताव किरचॉफ: जिन्होंने ब्लैक-बॉडी रेडिएशन शब्द गढ़ा

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गुस्ताव किरचॉफ(Gustav Kirchhoff), एक ऐसे जर्मन भौतिक विज्ञानी जिन्हें Electrical Circuits Spectroscopy और गर्म वस्तु द्वारा Black Body Radiation के उत्सर्जन को समझाने में योगदान दिया जाता है। गुस्ताव किरचॉफ ने ही 1862 में Black Body Radiation को गढ़ा था। जिनके अवधारणाओं के कम से कम दो अलग-अलग sets को हम “Kirchhoff Laws” के नाम से जानते हैं। Spectroscopy में इनके और इनके एक सहयोगी Robert Bunsen के काम पर The Bunsen-Kirchhoff Award का नाम पड़ा। इस लेख मे उनके जीवन के बारे मे विस्तार से जनिए।

जन्म और शिक्षा

गुस्ताव किरचॉफ का जन्म कोनिग्सबर्ग प्रशिया जर्मनी में 12 मार्च 1824 को हुआ था। उनका पूरा नाम गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ था। इनके पिता का नाम फ्रेडरिक किरचॉफ, एक वकील, और माता का नाम जोहाना हेनरीट विट्के था। इनका परिवार मूल रूप से प्रशिया के इवेंजेलिकल चर्च में लूथरन यानि वेस्टर्न ईसाई थे। गुस्ताव किरचॉफ 1847 में अलबर्टस यूनिवर्सिटी ऑफ कोनिग्सबर्ग से ग्रेजुएट हुए जहाँ वे कार्ल गुस्ताव जैकोब, फ्रांज अर्न्स्ट न्यूमैन और फ्रेडरिक जूलियस रिशेलॉट द्वारा निर्देशित गणित भौतिकी सेमिनार में भाग लिया करते थे।

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह बर्लिन चले आए। बर्लिन में प्रोफेसरशिप प्राप्त करने के कुछ वर्षों बाद ही किरचॉफ अपने सर्किट लॉज़ को फॉरमुलेट कर चुके थे। किरचॉफ के सर्किट लॉज़ आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग में सर्वव्यापी है। किरचॉफ ने अपने सर्किट लॉज़ के अध्ययन को एक सेमिनार अभ्यास के रूप में पूरा किया, जो कि बाद में उनका डॉक्टरेट शोध प्रबंध बन गया।

करियर

इस प्रकार उन्हें 1854 में हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी में बुलाया गया जहाँ उन्होंने रॉबर्ट बन्सेन के साथ स्पेक्ट्रोस्कोपी कार्यों में सहयोग किया। 1857 में उन्होंने गणना की, की एक बिना रेजिस्टेंस वाले तार में एक इलेक्ट्रिक सिग्नल लाइट की स्पीड से कैसे यात्रा करता है।

1857 में ही गुस्ताव किरचॉफ ने क्लारा रिशेलॉट से शादी की जिनके 5 बालक थे, क्लारा के निधन के बाद उन्होंने लुइस ब्रोमेली से शादी की थी। अपने इलेक्ट्रिक सिग्नल एक्सपेरिमेंट के बाद 1859 में किरचॉफ ने अपने थर्मल रेडिएशन के लॉ का प्रस्ताव रखा और 1861 में इसका प्रमाण भी दिया।

साथ में किरचॉफ और रॉबर्ट बन्सेन ने स्पेक्ट्रोस्कोप का आविष्कार किया, जिसका प्रयोग किरचॉफ ने सूर्य में एलिमेंट्स को पहचानने के लिए किया और इस प्रकार 1859 में स्पेक्ट्रोस्कोप के प्रयोग से पता चला कि सूर्य में भी सोडियम है। किरचॉफ और रॉबर्ट बन्सेन ने 1861 में सीज़ियम(cesium) और रूबिडीयाम(rubidium) एलिमेंट्स की खोज की और हैडलबर्ग में उन्होंने मैथमेटिशियन लियो कोएनिग्सबर्गर के साथ न्यूमैन के मॉडल पर एक मैथमेटिकल-फिजिकल सेमिनार चलाया।

जिसमें वे अपने और बन्सेन के कार्यों का भी विस्तार वर्णन किया करते थे। उन्होंने स्पेक्ट्रोस्कोपी के तीन नियम को फॉर्म्युलेट करके स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया, जो गर्म वस्तु द्वारा उत्सर्जित लाइट और स्पेक्ट्रल कंपोजीशन का वर्णन करते हैं। किरचॉफ के यह नियम डेविड ऑल्टर और एंडर्स जोनास के स्पेक्ट्रम एनालिसिस का सहयोग करते हैं।

1862 में किरचॉफ को सोलर स्पेक्ट्रम की निश्चित रेखाओं और आर्टिफिशियल स्पेक्ट्रा के ब्राइटलाइट लाइंस के इंवर्जन पर अपने शोध के लिए रंफर्ड मेडल से सम्मानित किया गया इस प्रकार 1875 में किरचॉफ ने बर्लिन में विशेष रूप से थियोरेटिकल फिजिक्स के लिए समर्पित पहले सम्मान को स्वीकार किया। बाद में किरचॉफ ने ऑप्टिक्स में भी योगदान दिया और मैक्सवेल के समीकरण को हल करने के लिए हुय्गेंस(Huygens) के सिद्धांत के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया। 1884 में किरचॉफ रॉयल नीदरलैंड्स एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज के मेंबर भी बने।

मृत्यु

17 अक्टूबर 1887 को गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ की मृत्यु हो गई। किरछऑफ के विज्ञान में योगदान इलेक्ट्रिक सर्किट स्पेक्ट्रोस्कोपी और ब्लैक बॉडी रेडिएशन आधुनिक विज्ञान को हमेशा विकसित करता रहेगा।

गुस्ताव किरचॉफ के नियम

गुस्ताव किरचॉफ के सर्किट नियम

किरचॉफ के सर्किट लॉज़ का पहला नियम यह है कि एक बिंदु (या नोड) पर मिलने वाले कंडक्टरों के नेटवर्क में धाराओं का बीजीय योग शून्य है। दूसरा नियम यह है कि एक बंद सर्किट में एक बंद सिस्टम में वोल्टेज का निर्देशित योग शून्य है।

किरचॉफ की स्पेक्ट्रोस्कोपी के तीन नियम

  • प्रकाश को उत्सर्जित करने के लिए उत्साहित एक ठोस, तरल या घनी गैस सभी तरंग दैर्ध्य(wavelengths) में विकिरण करेगी और इस तरह एक निरंतर स्पेक्ट्रम का उत्पादन करेगी।
  • प्रकाश को उत्सर्जित करने के लिए उत्साहित एक कम घनत्व वाली गैस विशिष्ट तरंग दैर्ध्य(wavelengths) में ऐसा करेगी और यह एक उत्सर्जन स्पेक्ट्रम का उत्पादन करती है।
  • यदि एक निरंतर स्पेक्ट्रम की रचना करने वाला प्रकाश शांत, कम घनत्व वाली गैस से गुजरता है, तो परिणाम एक अवशोषण स्पेक्ट्रम होगा।
  • किरचॉफ को परमाणुओं में ऊर्जा के स्तर के बारे में नहीं पता था। असतत वर्णक्रमीय रेखाओं के अस्तित्व को बाद में परमाणु के बोहर मॉडल(Bohr model) द्वारा समझाया गया, जिससे क्वांटम यांत्रिकी को आगे बढ़ने में मदद मिली।

किरचॉफ का थर्मोकैमिस्ट्री नियम

किरचॉफ ने 1858 में दिखाया कि, ऊष्मारसायन(thermochemistry) में, रासायनिक प्रतिक्रिया की ऊष्मा की भिन्नता को उत्पादों और अभिकारकों के बीच ऊष्मा क्षमता के अंतर द्वारा दिया जाता है – उनके समीकरण का एकीकरण एक तापमान पर प्रतिक्रिया से दूसरे तापमान पर प्रतिक्रिया की गर्मी के मूल्यांकन की अनुमति देता है।


स्त्रोत

  • Vavilova, I. B. (2009). Gustav Robert Kirchhoff founder of spectral analysis and astrophysics. Kinematics and Physics of Celestial Bodies22(6), 19-36.
  • Prevost, P., Stewart, B., Kirchhoff, G., & Bunsen, R. (1901). The Laws of Radiation and Absorption: Memoirs by Prévost, Stewart, Kirchhoff, and Kirchhoff and Bunsen (Vol. 15). American Book Company.
  • Ribeiro, D. (2015). Gustav Kirchhoff. Revista de Ciência Elementar3(2).

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